जमशेदपुर : टाटा स्टील फाउंडेशन को देश के विभिन्न राज्यों में ओल चिकी लिपि और संताली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास में उसके सतत एवं प्रभावशाली योगदान के लिए माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा सम्मानित किया गया।
यह सम्मान ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान प्रदान किया गया। यह समारोह अखिल भारतीय संताली लेखक संघ (AISWA) के तत्वावधान में आयोजित 22वें संताली “पारसी महा” समारोह का हिस्सा था। संताली भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य करने वाले चुनिंदा सामुदायिक संस्थानों और व्यक्तियों में टाटा स्टील फाउंडेशन का भी चयन किया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह में उपस्थित थीं। उनके साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर टाटा स्टील फाउंडेशन का प्रतिनिधित्व करते हुए निदेशक डी बी सुंदरा रामम तथा चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सौरव रॉय भी समारोह में शामिल हुए।
समारोह के दौरान टाटा स्टील फाउंडेशन को ओल चिकी शताब्दी पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार ओल चिकी लिपि के प्रचार, संरक्षण और विकास में फाउंडेशन के उत्कृष्ट समर्पण और योगदान को मान्यता देते हुए, लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु की विरासत को सम्मानित करने के उद्देश्य से दिया गया। फाउंडेशन की ओर से यह पुरस्कार निदेशक डी बी सुंदरा रामम और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सौरव रॉय ने प्राप्त किया। समारोह के दौरान माननीया राष्ट्रपति द्वारा 12 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यक्रम के पश्चात, टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संताली भाषा के प्रचार और संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 60 से अधिक व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए टाटा स्टील फाउंडेशन के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सौरव रॉय ने कहा, “यह सम्मान हमारे कार्यों के पीछे छिपे सामूहिक प्रयास को मान्यता प्रदान करता है – हमारी उन टीमों के समर्पण का, जो वर्षों से निरंतर इस दिशा में कार्यरत हैं, और संथाल समुदाय की उस सहभागिता का, जिसने रोजमर्रा के जीवन में भाषा को जीवित बनाए रखा है। ओल चिकी शताब्दी पुरस्कार प्राप्त करना हमारे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उस यात्रा का प्रतीक है जो समुदाय की आकांक्षाओं के साथ गहराई और विस्तार दोनों में आगे बढ़ी है। यह पुरस्कार ओल चिकी लिपि के पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरण को सशक्त करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करता है तथा हमारे कार्यक्षेत्रों में जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के व्यापक प्रयासों को नई गति प्रदान करता है।”
टाटा स्टील फाउंडेशन की ओल चिकी शिक्षा से जुड़ी पहल वर्ष 2011 में शुरू हुई थी और पिछले 14 वर्षों में यह साझेदार संगठनों के साथ निकट सहयोग के माध्यम से निरंतर विस्तार पाती गई है। शिक्षार्थियों को जोड़ने का कार्य ग्राम सभाओं और स्कूल प्रबंधन समितियों के माध्यम से किया जाता है, जिससे समुदाय की मजबूत भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित होता है। आज यह पहल झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम सहित पांच राज्यों में 966 शिक्षण केंद्रों तक विस्तृत है, जिसके माध्यम से कुल 45,000 से अधिक शिक्षार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। इनमें से 20,000 से अधिक शिक्षार्थी ओल चिकी लिपि के माध्यम से संताली भाषा का अध्ययन कर रहे हैं।
यह सम्मान टाटा स्टील फाउंडेशन की जनजातीय पहचान से जुड़ी टीमों के सतत कार्य का प्रमाण है, जो चुनौतीपूर्ण क्षेत्रीय परिस्थितियों में कार्य करते हुए समुदायों के साथ निकट साझेदारी में आदिवासी ज्ञान प्रणालियों, भाषा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।






