जमशेदपुर। प्रकृति फाइन आर्ट्स एकेडमी द्वारा आयोजित आगामी प्रकृति रेजिडेंशियल आर्ट वर्कशॉप के लिए देश के प्रसिद्ध चित्रकार बिजय बिस्वाल पहली बार जमशेदपुर पहुंचे। नागपुर के रहने वाले बिस्वाल पहले भारतीय रेल में कार्यरत थे, लेकिन कला के प्रति जुनून ने उन्हें इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाई। उनकी अद्भुत कला प्रतिभा और अनोखे कला दृष्टिकोण के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनका उल्लेख कर चुके हैं। बिस्वाल आज भारत के सबसे चर्चित और प्रेरणादायी कलाकारों में से एक माने जाते हैं। बिजय बिस्वाल की पेंटिंग्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे सिर्फ चित्र नहीं लगते, बल्कि उनमें जीवन की हलचल महसूस होती है। उनकी कृतियों को देखते हुए ऐसा लगता है मानो दृश्य हमारे सामने वास्तविक रूप में घट रहा हो, चाहे वह रेलवे स्टेशन की हलचल हो, कोई शांत प्राकृतिक दृश्य हो या फिर किसी पात्र की भावनाएँ। यही जीवंतता उनकी कला को दर्शकों के दिलों तक पहुँचाती है।

शुभम गोराई द्वारा स्थापित प्रकृति फाइन आर्ट्स एकेडमी पिछले पाँच वर्षों से जमशेदपुर में कलाकारों को प्रशिक्षित कर रही है। यह संस्थान क्लासिकल ड्रॉइंग, आउटडोर पेंटिंग और स्टूडियो स्टडीज़ के माध्यम से युवा कलाकारों को मजबूत कला आधार प्रदान करता है। इसी कला यात्रा को और समृद्ध करने के उद्देश्य से संस्थान ने बिजय बिस्वाल को आगामी आवासीय कार्यशाला के लिए आमंत्रित किया है।
बिस्वाल को बुलाने का उद्देश्य युवा कलाकारों को उनके अनुभव और विशेष तकनीकों का लाभ देना है। एक मास्टर आर्टिस्ट के रूप में वे एक्रेलिक और वॉटरकलर में अपनी दक्षता के लिए जाने जाते हैं। उनके लैंडस्केप और फिगरेटिव पेंटिंग्स देश-विदेश में सराही जाती हैं। वे अपने नवाचारपूर्ण तरीकों और कला दर्शन के माध्यम से उभरते कलाकारों को नई दिशा देते रहे हैं, यही वजह है कि इस कार्यशाला में उनकी उपस्थिति कलाकारों के लिए विशेष महत्व रखती है।

आयोध्या पहाड़ियों, पुरुलिया में होने वाली यह तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला प्रतिभागियों को प्रकृति के बीच रहकर कला सीखने का अवसर देगी। इस कार्यक्रम में बिजय बिस्वाल के साथ मधुसूदन दास और कनन खंडेलवाल जैसे अनुभवी कलाकार भी शामिल होंगे। प्रतिभागी मास्टर कलाकारों के साथ रहकर और उनसे सीखकर अपनी कला यात्रा में नई ऊर्जा और दृष्टि जोड़ सकेंगे।





