जमशेदपुर:
जमशेदपुर की 86 बस्तियों को मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर आज सीतारामडेरा स्थित कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए युवा समाजसेवी सुनील सिंह चौहान एवं वरिष्ठ नेता मनोज सिंह उज्जैन ने कहा कि अब बस्तीवासियों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि कानूनी रूप से अपने घरों का अधिकार चाहिए।
नेताओं ने कहा कि दशकों से इन बस्तियों में रह रहे लाखों लोग आज भी अपने ही घरों में “अतिक्रमणकारी” कहे जाने को मजबूर हैं, जो न केवल अमानवीय है बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमा के अधिकार का भी उल्लंघन है।
86 बस्तियों की प्रमुख समस्याएं
🔹 मालिकाना हक का अभाव
पीढ़ियों से बसे परिवार आज भी भूमि अधिकार से वंचित हैं और हर समय बेदखली के भय में जी रहे हैं।
🔹 विकास योजनाओं से वंचना
भूमि स्वामित्व न होने के कारण बस्तीवासियों को न तो बैंक से होम लोन मिलता है और न ही बुनियादी सुविधाओं का समुचित विकास हो पाता है।
🔹 प्रशासनिक एवं कानूनी पेचीदगियां
लीज एरिया, टाटा लीज और तकनीकी विवादों के कारण 86 बस्तियों का भविष्य लगातार अधर में लटका हुआ है।
समाधान का स्पष्ट रोडमैप : ‘जगा मिशन’ मॉडल
प्रेस वार्ता में नेताओं ने सरकार के समक्ष ठोस समाधान प्रस्तुत करते हुए कहा—
✔ ओडिशा का ‘जगा मिशन’ मॉडल लागू किया जाए
जिस प्रकार ओडिशा सरकार ने ‘जगा मिशन’ के तहत लाखों स्लम निवासियों को भूमि का पट्टा एवं मालिकाना हक प्रदान किया, उसी मॉडल को जमशेदपुर की 86 बस्तियों में भी तत्काल लागू किया जाए।
✔ कानूनों का सरलीकरण
सरकार जटिल नियमों और तकनीकी बाधाओं को समाप्त कर सीधे बस्तीवासियों के नाम पर मालिकाना हक का कानून बनाए।
आंदोलन की चेतावनी
सुनील सिंह चौहान एवं मनोज सिंह उज्जैन ने संयुक्त रूप से चेतावनी देते हुए कहा—
“यदि सरकार जल्द ही 86 बस्तियों के लिए ‘जगा मिशन’ की तर्ज पर ठोस नीति नहीं बनाती है, तो प्रत्येक बस्तीवासी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। यह हमारे घर, अधिकार और आत्मसम्मान की लड़ाई है, और इसमें किसी भी कीमत पर पीछे हटने का सवाल नहीं है।”
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी भोला सिंह, धीरेन्द्र सिंह, साकेत सिंह, शंकर राव, वरुण अग्रवाल, रोशन सिंह, अभिषेक सिंह, सन्नी शर्मा, कृष बिहारी, संजय सिंह, निखिल अग्रवाल, शुभम चौधरी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





