जमशेदपुर (Mango):
शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल मानगो बस स्टैंड के पास कल हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में लाल विश्वकर्मा की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को तुरंत एमजीएम अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत अत्यंत गंभीर बताई थी।
लगातार संघर्ष के बावजूद आज सुबह इलाज के दौरान लाल विश्वकर्मा की पत्नी ने भी दम तोड़ दिया। पति-पत्नी दोनों की असमय मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरा इलाका शोक में डूब गया है। इस हादसे ने दो मासूम बच्चों से उनके माता-पिता दोनों को छीन लिया। फिलहाल बच्चों की देखभाल करने वाला कोई निश्चित सहारा मौजूद नहीं है, जिससे उनका भविष्य गंभीर संकट में नजर आ रहा है।
हादसे के बाद पसरा मातम, गुस्से में लोग
हादसे की खबर फैलते ही आसपास के लोगों की भारी भीड़ घटनास्थल और अस्पताल में जुट गई। हर आंख नम थी, वहीं दूसरी ओर लोगों में गुस्सा और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा अचानक नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है।
लगातार हो रहे हादसे, फिर भी नहीं जाग रहा प्रशासन
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि मानगो बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही दुर्घटना संभावित जोन बन चुका है। दिन-रात भारी वाहनों, बसों, ऑटो और दोपहिया वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद न तो यातायात नियंत्रण की समुचित व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार के सुरक्षा उपाय।
पुलिस पर सीधा आरोप – चालान तक सीमित कार्रवाई
लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस केवल हेलमेट जांच और चालान काटने तक सीमित रह गई है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए न तो मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती होती है और न ही जाम की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों ने तीखे शब्दों में कहा कि पुलिस और प्रशासन “कान में तेल डालकर सोए हुए हैं”, जिसकी वजह से आम लोगों की जान लगातार खतरे में पड़ रही है।
भीषण जाम बना हादसों की बड़ी वजह
MANGO बस स्टैंड के आसपास लगातार भीषण जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क किनारे खड़े वाहन, अनियंत्रित बसें और अवैध स्टैंडिंग से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जाम खुलते ही वाहन तेज रफ्तार में निकलते हैं, जिससे ऐसे हादसे और बढ़ जाते हैं।
प्रशासन से उठ रही कई मांगें
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- मानगो बस स्टैंड क्षेत्र में स्थायी ट्रैफिक पुलिस की तैनाती हो
- स्पीड ब्रेकर, सिग्नल और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं
- अव्यवस्थित बस और ऑटो स्टैंड पर सख्त कार्रवाई की जाए
- मृतक दंपति के दोनों बच्चों को तत्काल मुआवजा, सरकारी सहायता और संरक्षण प्रदान किया जाए
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस की निष्क्रियता को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि जब एक ही स्थान पर बार-बार हादसे हो रहे हैं, तो आखिर कब प्रशासन जागेगा? क्या ऐसे हादसों के बाद ही सुधार किए जाएंगे?
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है।





