बारिडीह डोंगा घाट हादसा: एनडीआरएफ की तत्पर कार्रवाई से 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी का शव बरामद

Raj Sharma
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जमशेदपुर।
जोन नंबर–4, बिरसा नगर निवासी 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी के बारिडीह स्थित डोंगा घाट में डूबने की हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की सूचना जमशेदपुर की जानी-मानी समाजसेविका एवं राष्ट्रीय भ्रष्टाचार नियंत्रण एवं जनकल्याण संगठन की उपनिदेशक (जमशेदपुर, झारखंड) रानी गुप्ता को मिली, उन्होंने बिना विलंब किए पीड़ित परिवार से संपर्क किया और स्वयं दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

दुर्घटनास्थल की भौगोलिक बनावट और पानी की गहराई को देखते हुए खोज अभियान को चुनौतीपूर्ण पाया गया। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए समाजसेविका रानी गुप्ता ने तत्काल स्थानीय सिदगोड़ा थाना को घटना की सूचना दी और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित कराने की पहल की। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारियों से संपर्क स्थापित किया। विशेष रूप से अनुमंडल पदाधिकारी, धालभूम से बातचीत कर एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) की टीम को बुलाने की मांग की।

अनुमंडल पदाधिकारी ने पूरे मामले को ध्यानपूर्वक सुनते हुए भरोसा दिलाया कि एनडीआरएफ की टीम को जमशेदपुर भेजा जाएगा, हालांकि टीम को पहुंचने में लगभग एक दिन का समय लग सकता है। प्रशासनिक समन्वय के बाद आज 28 तारीख को सुबह लगभग 9:00 बजे एनडीआरएफ की टीम डोंगा घाट दुर्घटना स्थल पर पहुंची।

एनडीआरएफ टीम ने पहुंचते ही पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और आधुनिक उपकरणों के साथ त्वरित खोज अभियान शुरू किया। कई घंटों तक चले सघन प्रयासों के बाद टीम को सफलता मिली और 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी के शव को पानी से बाहर निकाला गया। शव की बरामदगी के बाद उसे स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया गया।

प्रशासन की ओर से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए एमजीएम अस्पताल भेज दिया गया। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के दुखद क्षणों में समाजसेविका रानी गुप्ता लगातार उनके साथ खड़ी रहीं और उन्हें सांत्वना देते हुए ढांढस बंधाती रहीं।

घटना के बाद समाजसेविका रानी गुप्ता ने जिला प्रशासन, अनुमंडल प्रशासन तथा एनडीआरएफ टीम के त्वरित, संवेदनशील और सकारात्मक प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन और राहत बलों के समन्वय से ही ऐसे कठिन हालात में पीड़ित परिवार को न्याय और सहयोग मिल पाता है।

यह हादसा क्षेत्र में जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय लोग प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

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