काश्मार पंचायत में बछिया प्रदर्शनी का आयोजन, विधान कुंभकार की बछिया को प्रथम पुरस्कार

Raj Sharma
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पटमदा

कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के निर्देश पर जिला पशुपालन पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के तत्वावधान में पटमदा प्रखंड अंतर्गत काश्मार पंचायत भवन परिसर में बछिया प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य पशुपालकों को उन्नत पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करना तथा कृत्रिम गर्भाधान योजना के लाभों से अवगत कराना था।

प्रदर्शनी में काश्मार पंचायत एवं आसपास के विभिन्न गांवों से आए पशुपालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पशुपालन विभाग द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी योजना कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न उन्नत नस्ल की बछियाओं को प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया गया। निर्णायक मंडली द्वारा बछियाओं के स्वास्थ्य, नस्ल, देखभाल एवं विकास के आधार पर चयन किया गया।

मेले में दर्जनों पशुपालकों ने अपना पंजीकरण कराया, जिनमें से सात किसानों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन पशुपालकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

प्रथम पुरस्कार विधान कुंभकार (साजदा) को मिला, जबकि द्वितीय पुरस्कार चंचल कुंभकार (साजदा) एवं तृतीय पुरस्कार स्वपन तिवारी (काश्मार) को प्रदान किया गया। विजेताओं को प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो तथा उनकी गायों को घुंघरू पहनाकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा अन्य प्रतिभागी किसानों को टॉनिक एवं मिनरल पाउडर देकर प्रोत्साहित किया गया।

प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए काश्मार पंचायत की मुखिया लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पशुपालन विभाग की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पंचायतवासियों से विभाग की विभिन्न योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के अवर प्रमंडल पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सुरेश झा, आदर्श ग्राम पदाधिकारी डॉ. अंबुज कुमार, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. सुमन विश्वास, डॉ. कुंदन कुमार, सुमन कुमारी सहित कई अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं पंचायत स्तर से मुखिया लक्ष्मी सिंह, वार्ड सदस्य सती रानी तिवारी, रेखा रानी तिवारी, एआई टेक्नीशियन किशोर कुमार तिवारी, मोतीलाल मुंडा, संजय, शक्ति पद महतो, पंचानन, साधन, मिथिलेश, पन्नालाल, सृष्टिधर, लंबोदर, स्वपन, मनोरंजन कुंभकार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

कार्यक्रम का समापन पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन अपनाने और उन्नत नस्ल के पशुओं के संरक्षण का संदेश देकर किया गया।

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