Mohit Kumar
दुमका : नेपाल के झापा जिला अंतर्गत भद्रपुर नगरपालिका वार्ड संख्या–3 से आए संताल आदिवासियों के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड भ्रमण के क्रम में भारत सेवाश्रम संघ, स्वामी प्रणवानंद विद्या मंदिर, पाथरा, रानीश्वर का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल के आगमन पर संघ के सचिव की अगुवाई में उनका भव्य एवं पारंपरिक स्वागत किया गया। सभी अतिथियों का अभिनंदन संताल परंपरा के अनुरूप तुनदाह और टमाक की मधुर धुनों के बीच किया गया। पुरुष सदस्य पारंपरिक पंखी पोशाक में तथा महिलाएं पारंपरिक साड़ियों में सुसज्जित थीं, जिससे पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में रंग गया।
स्वागत जुलूस आश्रम परिसर स्थित जाहेरथान तक पहुंचा, जहां जाहेर आयु, मारंगबुरु सहित अन्य इष्ट देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात कार्यक्रम स्थल पर औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर स्वामीजी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत सेवाश्रम संघ आदिवासी बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देता है, ताकि यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके। स्वागत भाषण विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिनंदन मुर्मू ने प्रस्तुत किया।
नेपाल से आए अतिथि श्री हेम कार्की ने विद्यालय के बच्चों से संवाद किया और आश्रम के शांत, सांस्कृतिक एवं अनुशासित वातावरण की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने ऐतिहासिक संताल काटा पोखर, दिगुली एवं रानीश्वर का परिभ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संताल हुल के गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा 1855–56 के ऐतिहासिक संताल हुल (क्रांति) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। यह भ्रमण संताल समाज की सांस्कृतिक एकता, पहचान और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
इस 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व श्री हेम कार्की, अध्यक्ष वार्ड संख्या–3, भद्रपुर नगरपालिका, जिला झापा (नेपाल) कर रहे थे। उन्होंने बताया कि नेपाल में निवास कर रहे संताल आदिवासियों की भाषा, संस्कृति और परंपराएं धीरे-धीरे विलुप्त हो रही हैं। इन्हीं मूल्यों के पुनर्स्थापन और अपनी जड़ों से जुड़ने के उद्देश्य से उन्होंने संतालों के मूल स्थल संताल परगना (दुमका) का भ्रमण करने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि संताल आदिवासियों का मूल स्थल दुमका जिला ही है।
प्रतिनिधिमंडल के सबसे बुजुर्ग सदस्य माझी बाबा लाल हांसदा (81 वर्ष) ने भावुक स्वर में बताया कि वे भारत कई बार आ चुके हैं, लेकिन अपने मूल स्थल संताल परगना, दुमका में यह उनका पहला आगमन है। अपनी इतिहास और संस्कृति की खोज ही उन्हें यहां खींच लाई। उनकी भावनात्मक बातों को सुनकर स्वामीजी, प्रधानाचार्य सहित उपस्थित सभी लोग अभिभूत और भावुक नजर आए।
प्रतिनिधिमंडल में रविलाल हांसदा, सोम बास्की, लुखीराम हेमब्रम, लुखीराम मार्डी, बेटका मुर्मू, सरकार हांसदा, ताला किस्कू, मंगल मुर्मू, सोम बेसरा और सिमोन बेसरा शामिल थे। वहीं विद्यालय परिवार की ओर से शिक्षक-शिक्षिकाओं में जयदेव दे, रणजीत राउत, बोध बोदरा, गोविंद यादव सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में उपस्थित रहे।






