बिहार आज अपने फैसले का ऐलान करने वाला है। 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में हुए मतदान के बाद अब वोटों की गिनती शुरू हो रही है। पूरे राज्य की नज़र इस बात पर टिकी है कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी की एनडीए सरकार सत्ता में लौटेगी या तेजस्वी यादव की महागठबंधन सरकार वापसी करेगी। एक्ज़िट पोल्स ने तस्वीर को लगभग साफ कर दिया है अधिकांश सर्वे एनडीए की आसान जीत का दावा कर रहे हैं। NDTV के ‘पोल ऑफ एक्ज़िट पोल्स’ ने 243 में से 146 सीटें एनडीए को दी हैं, यानी आराम से बहुमत के पार। वहीं महागठबंधन 92 के आस-पास सिमट सकता है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जो पहली बार मैदान में उतरी, सिर्फ एक सीट के आसपास दिखाई जा रही है।
ज़्यादातर एक्ज़िट पोल्स में एक ही बात कॉमन है बीजेपी और जेडीयू की वापसी तय है। Chanakya और CNX ने तो एनडीए को 150 से भी अधिक सीटें दी हैं। हालांकि कुछ सर्वे, जैसे Axis My India ने मुकाबले को कड़ा बताया है, लेकिन अंत में बाज़ी एनडीए के नाम ही जाते दिखी है। दिलचस्प बात यह है कि एक एक्ज़िट पोल में तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार से ज्यादा लोकप्रिय मुख्यमंत्री चेहरा बताया गया।
इस बार की राजनीति का एक बड़ा ट्विस्ट यह भी हो सकता है कि बीजेपी, जो 2020 में आरजेडी से सिर्फ एक सीट कम पर रही थी, इस बार राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे। एक्ज़िट पोल्स बीजेपी को 67-70 सीटें दे रहे हैं, जबकि आरजेडी 56-69 के दायरे में दिख रही है। जेडीयू के भी बीजेपी से अधिक सीटें जीतने की संभावना जताई गई है, जिससे ‘बिग ब्रदर’ वाली बहस फिर पलट सकती है। वोटरों के रुझान भी साफ़ संकेत दे रहे हैं कि महिलाओं ने एक बार फिर नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है, जबकि यादव और मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में तेजस्वी यादव के महागठबंधन के साथ खड़े दिखे। यही वजह है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।
इस बार वोटिंग प्रतिशत भी चर्चा में है करीब 67% मतदान। बिहार की राजनीतिक इतिहास में अक्सर ज्यादा मतदान का असर सरकार बदलने के रूप में देखा गया है। यही वजह है कि एनडीए ने मिठाइयों का ऑर्डर तैयार रखकर भी दिल की धड़कनें संभाल कर रखी हैं। दूसरी ओर तेजस्वी यादव कह रहे हैं “उच्च मतदान बदलाव की तरफ इशारा कर रहा है।” अब सबकी नज़र EVM के नतीजों पर है। क्या बिहार विकास के नाम पर एनडीए सरकार को दोबारा मौका देगा? या बेरोज़गारी, महंगाई और बदलाव की उम्मीद में महागठबंधन को सत्ता सौंपेगा? कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा कि जनता ने इस बार किस पर अपना भरोसा जताया है।





