K. Durga Rao
सरायकेला: औद्योगिक क्षेत्र में बड़ा विवाद सामने आया है। बिहार स्पंज आयरन कंपनी ने वनराज स्टील प्राइवेट लिमिटेड (आधुनिक ग्रुप) पर लगभग 55 करोड़ रुपये बकाया होने और बिना पूर्व सूचना प्लांट बंद करने का गंभीर आरोप लगाया है। कंपनी के अनुसार जनवरी 2022 से एग्रीमेंट के तहत संचालित प्लांट को 5 फरवरी 2026 को अचानक बंद कर दिया गया, जिससे कर्मचारियों, स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के करोड़ों रुपये फंस गए हैं। इस घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्र में हलचल और असंतोष का माहौल है।
60 करोड़ की मरम्मत के बाद संचालन सौंपा गया था
बिहार स्पंज आयरन का कहना है कि जनवरी 2021 में वनराज स्टील द्वारा नामित एजेंसी की निगरानी में प्लांट की व्यापक मरम्मत कराई गई थी। एकरारनामा के तहत तीनों किल्न, ईएसपी (प्रदूषण नियंत्रण इकाई), पावर प्लांट, आरएमपी और रेलवे साइडिंग की मरम्मत पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। तृतीय पक्ष सत्यापन के बाद जनवरी 2022 में प्लांट संचालन के लिए वनराज स्टील को सौंप दिया गया था।
किराये में राहत के बावजूद उत्पादन घटता गया
जानकारी के मुताबिक जुलाई 2025 में अधिक वर्षा से उत्पादन प्रभावित होने पर वनराज स्टील ने किराये में छूट की मांग की थी, जिस पर बिहार स्पंज के चेयरमैन ने छह माह तक आधा किराया लेने की सहमति दी। इसके बावजूद दिसंबर 2025 से कंपनी ने कच्चा माल मंगाना बंद कर दिया। पहले 500 टीपीडी क्षमता वाला किल्न बंद किया गया, फिर 100 टीपीडी किल्न को सीमित स्टॉक से चलाया गया और अंततः 5 फरवरी 2026 को प्लांट पूरी तरह बंद कर दिया गया।
कर्मचारियों और ठेकेदारों का भुगतान अटका
प्लांट बंद होने से कर्मचारियों और स्थानीय ठेकेदारों का करोड़ों रुपये बकाया रह गया है। आरोप है कि संचालन के दौरान मशीनों का नियमित रखरखाव नहीं किया गया, जिससे प्लांट की स्थिति खराब हो गई और उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई।
प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही के आरोप
बिहार स्पंज ने दावा किया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी ईएसपी यूनिट का नियमित संचालन नहीं किया गया। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद धुआं नियंत्रित करने के लिए कंपनी को 70 लाख रुपये अतिरिक्त देने पड़े। इसके बावजूद आसपास के गांवों में प्रदूषण को लेकर नाराजगी बनी रही।
विभिन्न मदों में करोड़ों की देनदारी
कंपनी के अनुसार वनराज स्टील पर बिजली, पानी, किराया, जीएसटी, रेलवे शुल्क और मरम्मत सहित कई मदों में बड़ी राशि बकाया है। विवरण इस प्रकार बताया गया है
बिजली: 1.5 करोड़ रुपये
पानी: 8 करोड़ रुपये (जलकर सहित लगभग 9 करोड़ लंबित)
क्रेडिटर: 24 करोड़ रुपये
रेंट: 4 करोड़ रुपये
जीएसटी: 3.5 करोड़ रुपये
रेलवे: 1 करोड़ रुपये
मरम्मत (किल्न व रोड): 12–15 करोड़ रुपये
स्टोर: 1 करोड़ रुपये
कुल मिलाकर लगभग 55 करोड़ रुपये की देनदारी का दावा किया गया है।
WHRB और बिजली कनेक्शन को लेकर भी विवाद
सूत्रों के अनुसार वेस्ट हीट रिकवरी बॉयलर (WHRB) लगाने को लेकर कोई औपचारिक एकरारनामा नहीं हुआ था। इसके बावजूद पावर प्लांट संचालित नहीं कर झारखंड बिजली बोर्ड से सीधे कनेक्शन लेने का मामला भी विवाद का कारण बना हुआ है।
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ी हलचल, प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
पूरे घटनाक्रम से सरायकेला के औद्योगिक क्षेत्र में अस्थिरता और चिंता का माहौल है। कर्मचारियों, ठेकेदारों और आसपास के ग्रामीणों का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है। अब सभी की नजर प्रशासनिक हस्तक्षेप, जांच और दोनों कंपनियों के बीच संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।






