Kishor kumar Tiwari
पटमदा : कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो सपनों को उड़ान मिलना तय है। इसी कहावत को साकार कर दिखाया है पटमदा प्रखंड के लोवाडीह गांव के दिव्यांग किसान गौरा चांद गोराई ने। शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी, बल्कि हालात से जूझते हुए खुद को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता चुना। गौरा चांद गोराई अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं और अपनी मेहनत के बल पर पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

गौरा चांद गोराई गेंदा फूल की खेती कर उससे माला तैयार करते हैं, जिसे वे बंगाल और जमशेदपुर के बाजारों में भेजते हैं। इसके साथ ही वे एक राशन दुकान का भी संचालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सब्जी की खेती की तुलना में फूल की खेती ज्यादा आसान है, इसमें खर्च कम और मुनाफा ज्यादा होता है। साथ ही फूलों में फसल खराब होने का खतरा भी कम रहता है। सब्जियों को तोड़ने के बाद तुरंत बाजार में बेचना जरूरी होता है, जबकि फूलों को जरूरत और ऑर्डर के अनुसार कभी भी तोड़कर माला बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है। गौरा चांद गोराई का मानना है कि फूलों की खेती ने न सिर्फ उन्हें आर्थिक मजबूती दी है, बल्कि उनके जीवन में भी खुशियों की बहार ला दी है।






