जमशेदपुर | संवाददाता
भविष्य की आर्थिक तैयारी को लेकर जहाँ देश के अधिकांश हिस्सों में सोच और वास्तविक तैयारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है, वहीं पूर्वी भारत इस मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी ‘रेडी फॉर लाइफ इंडेक्स’ में यह बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत में ‘सोच’ और ‘तैयारी’ के बीच 26 अंकों का अंतर है, जबकि पूर्वी भारत में यह अंतर घटकर 20 अंक रह गया है। यह संकेत देता है कि इस क्षेत्र के लोग आर्थिक मामलों में अधिक व्यावहारिक और अनुशासित हैं।
यह अध्ययन इप्सॉस इंडिया के सहयोग से 25 से 55 वर्ष आयु वर्ग के 1,836 कामकाजी लोगों पर किया गया। इसमें फाइनेंशियल प्लानिंग, इमरजेंसी फंड, स्वास्थ्य और रिटायरमेंट जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया।
इमरजेंसी फंड और सेहत में आगे
रिपोर्ट बताती है कि पूर्वी भारत के 53% लोगों के पास ऐसा इमरजेंसी फंड है, जिससे वे बिना आय के भी 4 महीने तक खर्च चला सकते हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 41% है।
इसके अलावा, हर चार में से तीन लोग 48 घंटे के भीतर पैसों का इंतजाम करने में सक्षम हैं, जो आर्थिक मजबूती का संकेत देता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग में भी बढ़त
रिटायरमेंट के मामले में भी पूर्वी भारत आगे नजर आता है। यहाँ 68% लोगों ने बचत शुरू कर दी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 55% है।
मिस्टर अरोड़ा, एचडीएफसी लाइफ के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ बिजनेस ऑफिसर ने कहा कि,
“पूर्वी भारत के लोग आर्थिक मामलों में ज्यादा ज़मीन से जुड़े हैं, लेकिन रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर अभी भी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।”
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दर्शाती है कि सही समझ, अनुशासन और समय पर योजना बनाकर आर्थिक सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम उठाए जा सकते हैं। पूर्वी भारत इस दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण बनकर उभर रहा है।





