- दलमा में ईको कॉटेज व जंगल सफारी पर ग्राम सभा सुरक्षा मंच कोल्हान की आपत्ति, पांचवीं अनुसूची उल्लंघन का आरोप
- मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक सविता महतो व सोमेश सोरेन रहे मौजूद
K Durga Rao
सरायकेला: वन्य जीव अभ्यारण्य में शनिवार को राज्य के पर्यटन, कला-संस्कृति, नगर विकास एवं आवास तथा उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक सविता महतो एवं विधायक सोमेश सोरेन ने विधिवत शिलापट्ट का अनावरण कर 30 ईको कॉटेज के निर्माण का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। इसके साथ ही उन्होंने पांच जंगल सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि 30 ईको कॉटेज के निर्माण से दलमा आने वाले पर्यटकों को अभ्यारण्य के समीप ठहरने की उत्कृष्ट सुविधा उपलब्ध होगी। इससे पर्यटक प्रकृति के सान्निध्य में रहकर दलमा की वादियों एवं नैसर्गिक सौंदर्य का भरपूर आनंद ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

विधायक सविता महतो ने कही कि दलमा में जंगल सफारी एवं ईको कॉटेज के निर्माण से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। वहीं विधायक सोमेश सोरेन ने इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
सफारी वाहनों को हरी झंडी दिखाने के बाद मंत्री, विधायक एवं विभागीय अधिकारियों ने स्वयं जंगल सफारी के माध्यम से दलमा अभ्यारण्य का भ्रमण किया। नई जंगल सफारी सेवा शुरू होने से अब पर्यटकों के लिए दलमा की सैर अधिक सुरक्षित और रोमांचकारी हो गई है।
कार्यक्रम में डीएफओ सवा आलम अंसारी, रेंजर दिग्विजय सिंह, शशिप्रकाश रंजन, दिनेश चंद्रा, झामुमो केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य मोहन कर्मकार, राजू गिरी, प्रमोद लाल, शेख बदरूद्दीन, जिला संयोजक बाघराई मार्डी, पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू, केंद्रीय सदस्य काबलू महतो, कालीपदो महतो सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
वहीं दूसरी ओर दलमा क्षेत्र सुरक्षा मंच, कोल्हान के सचिव सुकलाल पहाड़िया ने इस परियोजना पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य में इस प्रकार के निर्माण कार्यों से पूर्व ग्राम सभा की सहमति नहीं लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच विकास का विरोधी नहीं है, लेकिन पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा की अनदेखी करना कानून का घोर उल्लंघन है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने इस पर पुनर्विचार नहीं किया तो मंच आर-पार के आंदोलन के लिए मजबूर होगा।






