जमशेदपुर।
एनएचएआई द्वारा एनएच-18 पर बनाए जा रहे एलिवेटेड कॉरिडोर का कार्य जिस अव्यवस्थित और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से चल रहा है, उसने आम जनता की ज़िंदगी नरक बना दी है। डिमना चौक से लेकर मारुति शोरूम तक एनएच-18 पर चलना अब सफर नहीं, बल्कि धूल में डूबने की सजा बन चुका है।
दिनभर उड़ती मिट्टी और धूल से राहगीरों का दम घुट रहा है। हालात ऐसे हैं कि दोपहिया वाहन चालकों से लेकर कार सवार तक मिनटों में धूल से सन जाते हैं, वहीं सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह सड़क किसी ज़हर से कम नहीं।
काम की धीमी रफ्तार और बिना किसी ट्रैफिक मैनेजमेंट के चलते घंटों लंबा जाम आम बात हो गई है। एंबुलेंस, स्कूल वाहन और रोज़मर्रा के यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन एनएचएआई और जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
स्थिति को और भयावह बनाता है डिमना चौक पर खुलेआम हो रहा अतिक्रमण। चाय की एक दुकान (छोटू टी स्टॉल) द्वारा एनएच-18 पर ग्राहकों की गाड़ियां खड़ी करवा दी जाती हैं, जबकि दुकानदार खुद फुटपाथ पर अवैध कब्जा जमाए हुए है।
हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ दिन-दहाड़े पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हो रहा है, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ समय की बात है, कभी भी यहां कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। भारी वाहनों की आवाजाही, अवैध पार्किंग और उड़ती धूल—तीनों मिलकर मौत को न्योता दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
क्या किसी मासूम की जान जाने का इंतजार किया जा रहा है?
जनता की मांग है कि
- एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण कार्य को तेज़ और व्यवस्थित किया जाए
- धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव हो
- डिमना चौक सहित पूरे एनएच-18 से अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए
- दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए
अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह साफ है कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि जनता की जान से खुला खिलवाड़ है।





