प्रसिद्ध लेखक चेतन भगत ने खोली बॉलीवुड की सच्चाई, कहा – प्रसिद्धि घटने का डर कलाकारों को मानसिक बीमारी तक ले जाता है

चेतन भगत ने बॉलीवुड को ‘असुरक्षित उद्योग’ बताते हुए कहा कि कम होती लोकप्रियता और पहचान खोने के डर से कई अभिनेता मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं में फंस जाते हैं। उनके अनुसार, शोहरत की लत कलाकारों की रचनात्मकता को खत्म कर देती है। इसी कारण वे मुंबई छोड़कर दुबई में शांत और साधारण जीवन जीना पसंद कर रहे हैं।

Ansuman Bhagat
By
Ansuman Bhagat
Ansuman Bhagat
Senior Content Writer
Ansuman Bhagat is an experienced Hindi author and Senior Content Writer known for his fluent and impactful writing in modern Hindi literature. Over the past seven...
- Senior Content Writer
3 Min Read
चेतन भगत बोले ‘शोहरत की लत जिंदगी को बीमार बना देती है’, खुद रचनात्मकता बचाने के लिए छोड़ दिया मुंबई

चेतन भगत ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बॉलीवुड इंडस्ट्री को लेकर बड़ा खुलासा किया। उनके अनुसार मनोरंजन जगत “असुरक्षित” और “मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण” माहौल वाला उद्योग है, जहां कई अभिनेता अपनी कम होती लोकप्रियता के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते हैं। उन्होंने कहा कि शोहरत एक ऐसी लत है, जो धीरे-धीरे इंसान की जिंदगी को बीमार बना देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ अभिनेता रेस्तरां जाते हैं और अगर लोग उन्हें पहचान कर तस्वीर लेने के लिए आगे न आएं, तो उनका खाना भी अच्छा नहीं लगता। भगत के मुताबिक यह सोच एक बेहद दुखद और बीमार जीवन की ओर संकेत करती है।

उन्होंने यह भी माना कि फिल्मों की दुनिया में पहचान और फेम की चाह इतनी प्रबल होती है कि इंसान इसके प्रभाव से निकल ही नहीं पाता। इसी वजह से चेतन भगत ने मुंबई छोड़कर दुबई में बसने का फैसला किया, जहां उन्हें कोई पहचानता नहीं और वह अपने लेखन व रचनात्मक कार्य पर पूरी तरह केंद्रित रह पाते हैं। उनका कहना है कि लोकप्रियता का नशा रचनात्मकता को खत्म कर देता है और कलाकार चाहकर भी इससे दूर नहीं रह पाते।

बॉलीवुड के साथ अपने सफर को लेकर चेतन भगत ने बताया कि उन्होंने लगभग 10 से 15 साल फिल्म इंडस्ट्री में बिताए और उनकी छह किताबों पर फिल्में भी बनीं। हालांकि, चकाचौंध और ग्लैमर के बावजूद उन्हें यह प्रक्रिया कभी संतोष नहीं दे पाई। उनके मुताबिक, फिल्में उनकी कहानियों का सिर्फ अनुवाद भर थीं, जिसमें उनके रचनात्मक योगदान की भूमिका कम थी। उन्होंने खुद को “पीपल प्लीज़र” बताते हुए स्वीकार किया कि वे इसलिए फिल्मों में जुड़े क्योंकि भारत में लोग किताबों की तुलना में फिल्में देखना ज़्यादा पसंद करते हैं, लेकिन अब उन्हें एहसास हो गया है कि मनोरंजन उद्योग उनके लिए नहीं है।

चेतन भगत ने कहा कि बॉलीवुड में काम करने वाले कई लोग इस असुरक्षा के बीच फंसे रहते हैं कि उनकी पहचान कब फीकी पड़ जाएगी। इस डर से मानसिक दबाव और अवसाद जैसी स्थितियाँ पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि वहाँ खुशियाँ भी सिर्फ पहचान और लाइमलाइट पर निर्भर हो जाती हैं, और यह किसी भी कलाकार के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होती है।

Share This Article