आजकल जब लोग किसी रेस्तरां में जाते हैं, तो उनका मकसद सिर्फ़ खाना खाना नहीं होता, बल्कि थोड़ी देर के लिए शांति, सुकून और आराम पाना भी होता है। रेस्तरां और कैफ़े अब केवल भोजन परोसने की जगह नहीं, बल्कि लोगों के लिए ‘रिलैक्सेशन स्पेस’ बन चुके हैं, जहाँ वे खुद को खुला छोड़कर सहज महसूस करना पसंद करते हैं। लेकिन दिल्ली के प्रतिष्ठित ताज होटल में हाल ही में हुई एक घटना ने इस ‘आरामदायक माहौल’ की परिभाषा को लेकर बहस छेड़ दी है।
दरअसल, मशहूर मीडिया “योर स्टोरी” वेबसाइट की संस्थापक श्रद्धा शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व-ट्विटर) पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि उन्हें दिल्ली के ताज होटल के ‘हाउस ऑफ़ मिंग’ रेस्तरां में पलथी मारकर बैठने से रोका गया। श्रद्धा के मुताबिक, भोजन के बीच एक होटल मैनेजर उनके पास आया और कहा कि उनका बैठने का तरीका अन्य मेहमानों को असहज कर रहा है।
श्रद्धा ने इस घटना पर कड़ा रोष व्यक्त किया और सवाल उठाया कि एक मेहनत करने वाला व्यक्ति, जो अपनी कमाई से किसी प्रतिष्ठित स्थान पर जाकर आराम और सुकून चाहता है क्या उस पर इस तरह की टोकाटाकी उचित है? उन्होंने लिखा, “क्या मेरी गलती सिर्फ़ यह थी कि मैं पलथी मारकर बैठी थी? क्या अब ताज होटल मुझे ये बताएगा कि कैसे बैठना है और कैसे नहीं?”
वीडियो वायरल होते ही इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक ओर कई लोग श्रद्धा के समर्थन में खड़े हुए और इसे क्लास-आधारित व्यवहार बताया, वहीं दूसरे पक्ष के लोग होटल के नियमों और फाइन-डाइनिंग शिष्टाचार का बचाव कर रहे हैं। कुछ यूज़र्स ने कहा कि फाइन-डाइनिंग स्पेस की अपनी मर्यादा और एटीकेट होते हैं, जिन्हें सभी को समझना और मानना चाहिए; वहीं कईयों ने यह भी कहा कि ग्राहक के आराम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एक टिप्पणीकार ने व्यंग्य में लिखा, “घर पर हम पलथी मारकर नहीं बैठते, पर होटल में बैठना है तो उसे भी खास बनाना होगा, अब नियम सब जगह लागू होंगे।” कई लोगों ने ताज होटल के रवैये को क्लासिस्ट कहा, जबकि कुछ ने होटल के अधिकार को सही ठहराया।
फिलहाल ताज होटल की ओर से श्रद्धा शर्मा के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। यह मामला केवल एक विवाद तक सीमित नहीं रह गया है; यह उस बड़ा सवाल खड़ा करता है कि सार्वजनिक जगहों पर ‘आराम’ और ‘संस्कार’ की सीमाएँ कैसे तय की जाएँ और किस तरह के व्यवहार को स्वीकार्य माना जाए।





