अजीब ओ गरीब शो ने साल के आख़िरी हफ्ते में जमशेदपुर की शाम को बनाया यादगार

नरभेराम हंसराज ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में मंचित ‘अजीब ओ गरीब’ शो में अन्नेशा पार्था ने प्रभावशाली कथावाचन और सजीव संगीत के ज़रिये जीवन के अनोखे, सूक्ष्म और खूबसूरत पहलुओं को सामने लाकर वर्ष के अंतिम सप्ताह को यादगार बना दिया।

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संगीत के ज़रिये जीवन के अनकहे पल साझा करती अन्नेशा पार्था

जमशेदपुर। साल 2025 के आख़िरी सप्ताह में जमशेदपुरवासियों को कला, कहानी और संगीत से सजी एक यादगार शाम देखने को मिली। नरभेराम हंसराज ऑडिटोरियम, जमशेदपुर में आयोजित शो “अजीब ओ गरीब” ने दर्शकों को भावनाओं, यादों और कल्पनाओं की एक अलग ही दुनिया में ले गया। साल के अंत में हुए इस कार्यक्रम ने शहर की सांस्कृतिक शाम को खास बना दिया। यह कार्यक्रम स्टोरीटेलिंग और लाइव म्यूज़िक पर आधारित था, जिसे अन्नेशा पार्था और उनकी टीम ने प्रस्तुत किया। मंच से कहानियों के साथ संगीत का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को कहीं हँसाया तो कहीं गहराई से सोचने पर मजबूर किया। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 6 बजे हुई और सीमित सीटों के कारण दर्शकों में इसे लेकर पहले से ही खास उत्साह देखने को मिला। इस शो के टिकट बुकमायशो के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे।

शो की सबसे अहम विशेषता यह रही कि अन्नेशा पार्था ने अपनी संगीत प्रस्तुति के साथ जीवन के कुछ बीते पलों और व्यक्तिगत अनुभवों को भी दर्शकों के सामने रखा। उनके गीतों और कहानियों में संघर्ष, रिश्तों की जटिलताएँ, उम्मीद और आत्मचिंतन की झलक साफ दिखाई दी। ये प्रस्तुतियाँ सिर्फ मनोरंजन नहीं थीं, बल्कि उनमें ऐसे संदेश छुपे थे जो दर्शकों को जीवन के प्रति एक नई सोच देने वाले साबित हुए।

“अजीब ओ गरीब” सिर्फ एक मंचीय कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह जीवन के छोटे-छोटे अजीब और खूबसूरत पहलुओं को कहानी और संगीत के ज़रिए सामने लाने का प्रयास था। कलाकारों की सजीव प्रस्तुति ने दर्शकों को कार्यक्रम से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया और हर पल को खास बना दिया। साल के आख़िर में आयोजित इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने जमशेदपुर की शाम को सचमुच हसीन और यादगार बना दिया। एक पत्रकार की नज़र से देखा जाए तो यह शो इस बात का प्रमाण था कि जब कला, कहानी और संगीत एक साथ आते हैं, तो वे सिर्फ मनोरंजन नहीं करते, बल्कि समाज और जीवन को देखने का नज़रिया भी बदल देते हैं।

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