जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का समापन, कला-साहित्य के संगम ने रचा यादगार अध्याय

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जमशेदपुर : कला, साहित्य और विचारों के अनूठे संगम के रूप में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का समापन रविवार को भव्य आयोजन के साथ हुआ। अंतिम दिन पंचायत वेब सीरीज फेम अभिनेता पंकज झा उर्फ विधायक जी और पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने अपनी मौजूदगी से समां बांध दिया।

फेस्टिवल के एक प्रमुख सत्र में फिल्म निर्देशक अभिषेक चौबे (‘उड़ता पंजाब’ फेम) और अभिनेता पंकज झा के बीच बेबाक संवाद हुआ। इस दौरान अभिषेक चौबे ने फिल्म जगत की चुनौतियों और तल्ख सच्चाइयों पर खुलकर बात की, वहीं पंकज झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिनेमा ने समाज को नुकसान भी पहुंचाया है और इस पर गंभीर आत्ममंथन की जरूरत है।

हिंदी कार्टून, जनजातीय कला और सृजन पर गहन चर्चा
‘लकीरों में छुपा सच-हिंदी कार्टून की ताकत’ विषयक परिचर्चा में मशहूर कार्टूनिस्ट आबिद सुरती (ढब्बू जी कार्टून के जनक) और मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में कार्टूनिस्ट का कार्य किस तरह जोखिमपूर्ण होता गया है। उन्होंने कार्टून, पोर्ट्रेट और कैरिकेचर के अंतर को भी विस्तार से समझाया।

जनजातीय चित्रकारी पर आधारित सत्र में प्रख्यात कलाकार मनीष पुष्कले और भज्जू सिंह श्याम ने कैनवास के रंगों के माध्यम से आदिवासी कला को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि सृजन के लिए जुनून सबसे जरूरी तत्व है, जिसे किसी भी परिस्थिति में खोना नहीं चाहिए। इससे पहले चित्रकारी पर वर्कशॉप का आयोजन हुआ, जिसमें आकांक्षा सिंह और पुनीता मिश्रा ने भाग लिया।

नदियों, इतिहास और मौखिक परंपराओं पर विमर्श
फेस्टिवल के एक महत्वपूर्ण सत्र में वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता दिनेश मिश्रा ने कोसी नदी के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बिहार के सहरसा जिले के नोहटा प्रखंड में पहले कोसी की बाढ़ का प्रभाव सीमित समय तक रहता था, लेकिन नेपाल में बांध निर्माण के बाद नदी का प्राकृतिक फैलाव सिमट गया, जिससे बाढ़ का असर बढ़ता चला गया।

दिनेश मिश्रा ने कहा कि जमीनी स्तर पर लगातार काम हो रहा है, लेकिन उसे अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा। इस दौरान सोपान जी ने कहा कि अब तक किए गए प्रयासों से भविष्य में काम करने वालों को एक “बना-बनाया ट्रैक” मिलेगा, जिससे आगे की पहलें अधिक सहज होंगी।
लेखक आबिद सुरती ने चंबल क्षेत्र में डाकुओं से मिले अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन्हीं अनुभवों से ‘बहादुर’ नामक पात्र का जन्म हुआ, जिसे बाद में एशिया और बॉलीवुड की फिल्मों में भी जगह मिली।
आदिवासी समाज की मौखिक परंपराओं पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लिखित दस्तावेजों के अभाव में आदिवासी इतिहास पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो पाया है। इस क्रम में मनोज और कायनात के प्रयासों का उल्लेख किया गया, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में करीब तीन लाख किलोमीटर की यात्राएं कर आदिवासी जीवन, संस्कृति और परंपराओं को दर्ज किया।

समापन समारोह में कालबेलिया नृत्य ने मोहा मन
फेस्टिवल के समापन समारोह में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी पीयूष पांडेय और टाटा स्टील कॉरपोरेट सर्विसेज के वीपी डीबी सुंदर रामम विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

समारोह के दौरान पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने अपने कालबेलिया नृत्य से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कला, साहित्य, समाज और संस्कृति से जुड़े विचारों के साथ जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का यह संस्करण यादगार बनकर संपन्न हुआ।

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