तीन राष्ट्रों ने सम्मानित किया बीजू पटनायक को, उनके साहस और मानवता को दुनिया ने सराहा

Ansuman Bhagat
By
Ansuman Bhagat
Ansuman Bhagat
Senior Content Writer
Ansuman Bhagat is an experienced Hindi author and Senior Content Writer known for his fluent and impactful writing in modern Hindi literature. Over the past seven...
- Senior Content Writer
4 Min Read
भारत, इंडोनेशिया और रूस ने बीजू पटनायक को सम्मानित किया, उनकी बहादुरी, समर्पण और अंतरराष्ट्रीय योगदान ने दुनिया में उन्हें अमिट छाप दिलाई।

बीजू पटनायक केवल ओडिशा या भारत तक सीमित नाम नहीं थे; वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिनकी बहादुरी और दूरदर्शिता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अद्वितीय सम्मान दिलाया। 1997 में उनके निधन के समय, उन्हें तीन देशों के राष्ट्रीय ध्वजों भारत, इंडोनेशिया और रूस (पूर्व सोवियत संघ) में लपेटकर श्रद्धांजलि दी गई। यह घटना अत्यंत दुर्लभ और असाधारण है, क्योंकि दुनिया में बहुत ही कम व्यक्तियों को तीन अलग-अलग राष्ट्रों द्वारा इस प्रकार सम्मानित किया गया।

बीजू पटनायक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, निडर पायलट और ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे। उनका जीवन साहस, दूरदर्शिता और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक था। उनके कार्य केवल प्रशासनिक या राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अद्वितीय योगदान दिया।

इंडोनेशिया का झंडा: 1947 में, जब इंडोनेशिया डच उपनिवेश से स्वतंत्रता की जंग लड़ रहा था, तब पटनायक ने अपनी जान की परवाह किए बिना इंडोनेशियाई नेताओं सुकरनो और हत्ता को सुरक्षित बाहर निकालने में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके इस साहसिक कार्य के लिए इंडोनेशिया ने उन्हें “Bhoomi Putra of Indonesia” यानी “इंडोनेशिया का पुत्र” की उपाधि दी। यह सम्मान उनके अदम्य साहस और मानवता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

रूस (पूर्व सोवियत संघ) का झंडा: बीजू पटनायक ने भारत और सोवियत संघ के बीच स्थायी, सकारात्मक और रणनीतिक संबंध स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साहसिक और तकनीकी योगदान ने सोवियत नेतृत्व को अत्यधिक प्रभावित किया, और उन्होंने पटनायक को अपने राष्ट्रीय ध्वज से सम्मानित किया। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता उनके बहुआयामी दृष्टिकोण और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।

भारत का झंडा: स्वाभाविक रूप से, भारत का राष्ट्रीय ध्वज उनके वीरता, स्वतंत्रता संग्राम और देशभक्ति का प्रतीक बना। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया, बल्कि अपने अदम्य साहस और दूरदर्शिता से लोगों को प्रेरित किया। उनके नेतृत्व में ओडिशा और भारत ने कई सामाजिक, राजनीतिक और रणनीतिक उपलब्धियाँ हासिल कीं।

तीन देशों द्वारा सम्मानित होना केवल एक व्यक्तिगत गौरव नहीं, बल्कि पूरे भारत और ओडिशा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव गाथा है। यह हमें याद दिलाता है कि सच्चा पराक्रम केवल देशभक्ति तक सीमित नहीं होता, बल्कि मानवता, न्याय और वैश्विक सहयोग के लिए भी उसे उच्चतम स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है।

बीजू पटनायक की जीवन गाथा युवाओं, इतिहासकारों और देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। यह बताती है कि साहस, दृष्टिकोण और समर्पण के माध्यम से कोई भी व्यक्ति न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान और पहचान अर्जित कर सकता है। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि साहस और मानवता की कोई सीमा नहीं होती; उनका प्रभाव पीढ़ियों तक स्थायी रहता है।

बीजू पटनायक आज भी यह प्रेरणा देते हैं कि कठिनाइयों और जोखिमों के बावजूद, यदि दृष्टिकोण, निष्ठा और साहस से कार्य किया जाए, तो व्यक्ति ना केवल अपने देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए आदर्श बन सकता है। तीन देशों के राष्ट्रीय झंडों में लिपटे उनका अंतिम सम्मान इस बात का प्रतीक है कि उनका योगदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्थायी प्रेरणा बनकर जीवित है।

Share This Article