Patamda : मॉडल स्कूल पटमदा में छात्राओं को मिला कठोर दंड

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पटमदा : झारखंड में एक बार फिर से स्कूली छात्राओं के साथ हुए अनुचित व्यवहार ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पटमदा स्थित मॉडल स्कूल में कक्षा 7 की चार छात्राओं को बिना किसी ठोस वजह के 500 बार कान पकड़कर उठक-बैठक करने का शारीरिक दंड दिया गया, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई।

160 बार के बाद बिगड़ी छात्रा की तबीयत

छात्राओं — कल्पना दास, रासी दास, पल्लवी प्रमाणिक (सभी लावा निवासी) और नमिता बेसरा (तिलाबनी निवासी) — ने बताया कि 160 बार उठक-बैठक के बाद ही कल्पना दास की सांस फूलने लगी, जिसके बाद वे खुद को कक्षा में ले गईं। घटना मंगलवार को हुई, और बुधवार को सभी बच्चियां बदन दर्द और कमजोरी के चलते घर पर सोई रहीं, लेकिन किसी ने घरवालों को सच नहीं बताया।

दबाव में आया सच बाहर

गुरुवार की सुबह बच्चियों ने स्कूल जाने से इनकार किया और अंततः जब सख्ती से पूछा गया तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।
नमिता बेसरा उस दिन स्कूल नहीं गई, जबकि बाकी तीन छात्राएं पहुँचीं, लेकिन वहां उन्हें फिर से प्रताड़ित किया गया और कहा गया, “अब तुम्हारी कॉपी मैं चेक नहीं करूंगी।”

अभिभावकों की शिकायत पर मिली टाल-मटोल

जब अभिभावक — नित्यानंद दास, विजय कृष्ण प्रमाणिक और समीर तंतुबाई — ने स्कूल जाकर प्रधान शिक्षिका स्नेहलता कुमारी से पूछताछ की, तो पहले उन्होंने घटना से इनकार किया।
बाद में गलती मानते हुए कहा, “भविष्य में ऐसा नहीं होगा।” लेकिन शिकायत के बाद भी छात्राओं को प्रताड़ित करना बंद नहीं हुआ।

अस्पताल में जांच, विधायक प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे

छात्राओं की बिगड़ती हालत को देखते हुए अभिभावक उन्हें लेकर माचा स्थित सीएचसी अस्पताल पहुंचे। वहां विधायक प्रतिनिधि चंद्रशेखर टुडू भी पहुंचे और छात्राओं से बात कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने तत्काल बीईईओ प्रभाकर कुमार से कार्रवाई की मांग की, जिस पर उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया।

प्रधान शिक्षिका का बचाव

प्रधान शिक्षिका स्नेहलता कुमारी ने सफाई देते हुए कहा,

“बच्चियों को साफ-सफाई का काम दिया गया था, जो उन्होंने नहीं किया। शिकायत आने पर नाराज होकर दंड दिया। गलती हो गई, अब आगे से ऐसा नहीं होगा।”

अब उपायुक्त और सांसद को दी जाएगी शिकायत

अभिभावकों में इस घटना को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। उन्होंने ऐलान किया है कि शुक्रवार को उपायुक्त, सांसद, विधायक और जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी जाएगी और प्रधान शिक्षिका को हटाने की मांग की जाएगी ताकि स्कूल का माहौल सुधरे।

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