रांची खुटी
पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने खूंटी दौरे के दौरान अखिल भारतीय सरना समाज के सदस्यों के साथ पेसा नियमावली सहित आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने पेसा को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि वर्तमान पेसा नियमावली पूरी तरह आदिवासी विरोधी है। नियमावली के पहले पन्ने पर ही पारंपरिक ग्राम प्रधानों के अलावा “अन्य” के लिए रास्ता छोड़ा गया है, जिससे मनमानी की गुंजाइश बनी रहती है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में बनी नियमावली में सीएनटी-एसपीटी एक्ट उल्लंघन के मामलों में ग्राम सभा को जमीन वापस दिलाने का अधिकार दिया गया था और शेड्यूल एरिया में जमीन हस्तांतरण से पहले ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने इन अधिकारों को हटा दिया।
पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि जिस दिन पेसा नियमावली पास की गई, उसी कैबिनेट बैठक में कोल्हान के नोवामुंडी में बिना ग्राम सभा की सहमति के हिंडाल्को को 850 एकड़ से अधिक जमीन दे दी गई, जिससे सरकार की मंशा साफ हो जाती है।
उन्होंने कहा कि जैसे जल के बिना मछली नहीं रह सकती, वैसे ही जमीन के बिना आदिवासी संस्कृति का अस्तित्व संभव नहीं है। यदि शेड्यूल एरिया में कोई फैक्ट्री जमीन लेती है तो जमीनदाताओं को केवल एकमुश्त राशि नहीं, बल्कि मुनाफे में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए और फैक्ट्री बंद होने पर जमीन मूल मालिक को लौटाई जानी चाहिए।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि पेसा कानून आदिवासियों की पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए बना था, लेकिन महागठबंधन सरकार ने इसकी आत्मा को कुचल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों की सरलता का फायदा उठाकर कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती है।
बैठक में मौजूद सरना समाज के सदस्यों ने पेसा नियमावली को लेकर आक्रोश जताया और गांव-गांव जाकर सरकार के आदिवासी विरोधी रवैए के खिलाफ जनजागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय सरना समाज के अध्यक्ष भीम सिंह मुंडा, नगर पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रानी टूटी, छोटराय मुंडा, मनोज कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।





