हिजला मेला 2026 को लेकर ग्रामीणों की बैठक, ओल-चिकी लिपि व मूल परंपराओं के संरक्षण की मांग

Raj Sharma
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दुमका:
राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव–2026 की तैयारियों को लेकर हिजला गांव में मंझी बाबा इमानुवेल हांसदा की अध्यक्षता में कुल्ही दुरुप (ग्रामीण बैठक) का आयोजन किया गया। बैठक में मेला आयोजन से जुड़ी विभिन्न मांगों, सुविधाओं और सांस्कृतिक संरक्षण के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही पूर्व में उपायुक्त सह अध्यक्ष एवं अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव, हिजला मेला समिति को सौंपे गए लिखित आवेदन पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से मांग की कि मेला से संबंधित सभी बैनर, पोस्टर, स्मारिका, आमंत्रण पत्र एवं प्रचार सामग्री में संताली भाषा की ओल-चिकी लिपि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इसके अलावा कृषि प्रदर्शनी, पारंपरिक प्रदर्शनी एवं आदिवासी संग्रहालय (म्यूजियम) में प्रदर्शित वस्तुओं के नाम और जानकारी भी ओल-चिकी लिपि में अंकित करने की मांग की गई।

ग्रामीणों ने मेला परिसर में स्थित सभी कला मंचों के नाम स्थायी रूप से ओल-चिकी लिपि में लिखने, तथा पवित्र स्थल दिसोम मारांङ बुरू थान में किसी अन्य धर्म से संबंधित फोटो, बैनर, प्रचार सामग्री या दुकान लगाने पर रोक लगाने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि हिजला मेला संताल समाज की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और रीति-रिवाजों पर आधारित है, ऐसे में बाहरी धार्मिक गतिविधियों से सामाजिक समरसता प्रभावित हो सकती है।

बैठक में यह भी मांग की गई कि माननीय दुमका विधायक बसंत सोरेन की पहल पर नवनिर्मित दिसोम मरांग बुरु थान का फोटो सभी होर्डिंग और बैनर में दर्शाया जाए। साथ ही हिजला मेला समिति में हिजला गांव के जयदेव हांसदा, दिलीप सोरेन, रुबिलाल हांसदा, एमेल मरांडी, बुद्धिलाल मरांडी, लाल हांसदा एवं देवी सोरेन को शामिल किया जाए।

ग्रामीणों ने गांव की बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देने की मांग करते हुए कहा कि मांझी थान और जाहेर थान को भव्य रूप से सजाया जाए, जाहेर थान की स्थायी घेराबंदी की जाए तथा मेला के दौरान दोनों स्थलों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित हो। इसके अलावा हिजला गांव में लंबे समय से खराब पड़े तीन सोलर चालित जल मीनार, दो चापाकल को शीघ्र चालू करने, मेला अवधि में दिन में दो वक्त नल जलापूर्ति, हर बिजली खंभे पर वेपर लाइट लगाने तथा मेला परिसर स्थित पानी टंकी में लोहे का नल लगाकर स्थायी रूप से चालू करने की मांग की गई।

ग्रामीणों ने वर्ष 2025 के हिजला मेला के दौरान मंझी आवास (पुआल घर) एवं गांव के स्वयंसेवकों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। साथ ही मेला के दौरान एवं मेला समाप्ति के तुरंत बाद विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने की मांग की गई, ताकि पॉलीथिन व कचरा खाने से मवेशियों के बीमार होने की घटनाएं रोकी जा सकें।

मंझी बाबा इमानुवेल हांसदा ने ग्रामीणों को जानकारी दी कि अनुमंडल पदाधिकारी सह सचिव, हिजला मेला समिति द्वारा इन सभी मांगों पर सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया गया है। बैठक में इस मुद्दे को लेकर सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे और सभी ने एकजुट होकर मेला को पारंपरिक, सांस्कृतिक और सुव्यवस्थित रूप में आयोजित करने की मांग दोहराई।

 

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