मुंबई/जमशेदपुर : Tata Steel ने जर्मनी की ऊर्जा परिवर्तन प्रौद्योगिकी स्टार्टअप Kraftblock GmbH के साथ साझेदारी में अपने जमशेदपुर वर्क्स स्थित सिंटर प्लांट-3 (SP-3) में स्थापित थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणाली के सफल और विश्वसनीय संचालन का लगभग एक वर्ष पूरा कर लिया है।
यह अभिनव प्रणाली सिंटरिंग प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न उच्च तापमान वाली अपशिष्ट ऊष्मा को पुनर्प्राप्त कर उसे कुशलतापूर्वक संग्रहित करती है और पुनः प्रक्रिया में उपयोग करती है। सामान्यतः वातावरण में उत्सर्जित हो जाने वाली इस ऊष्मा का उपयोग अब प्रोसेस जल को गर्म करने में किया जा रहा है। इस पहल से ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी आई है, प्लांट की उत्पादकता में सुधार हुआ है और प्रतिवर्ष लगभग 22,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (tCO₂) उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है।
एक वर्ष पूर्व शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट अब सकारात्मक परिणाम दे रहा है और स्वच्छ व अधिक ऊर्जा-कुशल स्टील निर्माण की दिशा में कंपनी की रणनीति का महत्वपूर्ण चरण बन चुका है।
चैतन्य भानु, वाइस प्रेसिडेंट – ऑपरेशंस, टाटा स्टील जमशेदपुर, ने कहा कि स्टील उत्पादन का डीकार्बोनाइजेशन ऊर्जा के कुशल उपयोग से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली ऊर्जा-गहन चरणों से उत्पन्न ऊष्मा को पुनः उपयोग में लाकर अधिक ऊर्जा-कुशल और विस्तार योग्य मॉडल प्रस्तुत करती है।
वहीं, डॉ. मार्टिन शिख्टेल, सीईओ एवं सह-संस्थापक, क्राफ्टब्लॉक GmbH, ने कहा कि यह परियोजना इस्पात उद्योग में ऊष्मा पुनर्प्राप्ति और भंडारण की व्यापक व्यवहार्यता को दर्शाती है। फर्नेस से लेकर फ्लेयरिंग ज़ोन तक कई क्षेत्रों में इसके बहु-स्तरीय उपयोग की संभावनाएँ हैं, जो उद्योग को अधिक ऊर्जा-कुशल और लागत-प्रभावी बनाने में सहायक होंगी।
यह परियोजना टाटा स्टील के स्टार्टअप एंगेजमेंट प्रोग्राम ‘Tomorrow Lab’ के अंतर्गत लागू की गई है, जिसका उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम से नवाचारपूर्ण समाधानों की पहचान कर उनका पायलट परीक्षण और व्यापक क्रियान्वयन करना है।
उल्लेखनीय है कि सिंटरिंग प्रक्रिया में आयरन ओर के महीन कणों को थर्मल एग्लोमरेशन के माध्यम से बड़े, मजबूत ठोस टुकड़ों (सिंटर) में बदला जाता है, जिन्हें ब्लास्ट फर्नेस में लौह उत्पादन के लिए उपयोग किया जाता है। SP-3 में इस तकनीक की सफलता से भविष्य में उच्च तापमान वाले फर्नेस और अन्य क्षेत्रों में इसके विस्तार की संभावनाएँ और मजबूत हुई हैं।






