आज लगने वाला चंद्र ग्रहण खगोलीय दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, ज्योतिषीय रूप से भी उतना ही प्रभावशाली माना जाता है। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या लालिमा लिए हुए दिखाई देता है, जिसे सामान्य भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा मन, भावनाओं, माता, जल तत्व और मानसिक संतुलन का कारक माना गया है। ऐसे में चंद्र ग्रहण का प्रभाव सीधे तौर पर भावनात्मक और मानसिक स्तर पर देखने को मिलता है।
चंद्र ग्रहण का ज्योतिषीय महत्व
चंद्र ग्रहण को आत्ममंथन और अंतर्मुखी ऊर्जा का समय माना जाता है।
यह अधूरे कार्यों के समापन और नई दिशा तय करने का संकेत देता है।
ग्रहण के दौरान राहु-केतु की सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे अचानक घटनाएं, मानसिक अस्थिरता या भावनात्मक उतार-चढ़ाव संभव है।
‘ब्लड मून’ परिवर्तन, कर्मफल और गुप्त बातों के उजागर होने का प्रतीक माना जाता है।
राशियों पर संभावित प्रभाव
मेष, सिंह, धनु (अग्नि तत्व)
निर्णय लेने में सावधानी रखें। आवेश में आकर कोई बड़ा कदम न उठाएं।
वृष, कन्या, मकर (पृथ्वी तत्व)
आर्थिक मामलों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देना होगा। निवेश सोच-समझकर करें।
मिथुन, तुला, कुंभ (वायु तत्व)
रिश्तों और संवाद में गलतफहमी से बचें। पुराने मित्रों से संपर्क बन सकता है।
कर्क, वृश्चिक, मीन (जल तत्व)
भावनात्मक संवेदनशीलता बढ़ेगी। आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
मंत्र जाप, ध्यान और दान-पुण्य करें।
‘ॐ चंद्राय नमः’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप शुभ रहेगा।
ग्रहण के बाद स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
क्या न करें:
ग्रहण काल में भोजन बनाने या खाने से बचें।
अनावश्यक बहस या विवाद से दूर रहें।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आध्यात्मिक संदेश
चंद्र ग्रहण हमें यह सिखाता है कि अंधकार अस्थायी है। जैसे चंद्रमा ग्रहण के बाद पुनः अपनी पूर्ण आभा में लौट आता है, वैसे ही जीवन के कठिन दौर भी बीत जाते हैं। यह समय आत्मविश्लेषण, नकारात्मकता को त्यागने और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है।
ग्रहण का प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और वर्तमान गोचर पर निर्भर करता है, इसलिए व्यक्तिगत परामर्श के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
यह चंद्र ग्रहण / ब्लड मून (Total Lunar Eclipse) 3 मार्च 2026 को लग रहा है – जो खगोलीय और ज्योतिषीय दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण घटना है, खासकर क्योंकि यह होली के दिन भी पड़ रहा है।
चंद्र ग्रहण (लूनर इक्लिप्स) – समय (भारतीय मानक समय)
तारीख: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
पूरी अवधि:
ग्रहण शुरू: दोपहर 3:20 PM IST
पूर्णता (Totality) शुरू: लगभग 4:34 PM IST
अधिकतम प्रभाव: लगभग 5:00 PM – 5:25 PM IST
पूर्ण ग्रहण समाप्त: 5:32 PM IST
ग्रहण पूरा खत्म: 6:46 PM – 7:53 PM IST (पेनुम्ब्रल चरण तक)
ध्यान दें कि भारत के अधिकांश भागों में चंद्रमा पहले अस्त होता है और ग्रहण के अंतिम चरण में ही दिखाई देगा – इसलिए भारत में दृश्यता सिर्फ अंतिम लगभग 15–30 मिनट के लिए ही हो पायेगी।
सूतक काल – कब से कब तक?
ज्योतिष और परंपरा के अनुसार चंद्र ग्रहण से पहले सूतक काल (अशुभ अवधि) शुरू हो जाता है, जिसमें कुछ विशेष नियम होते हैं:
सूतक काल शुरू: सुबह 6:20 AM IST
सूतक समाप्त: ग्रहण के पूरी तरह खत्म होने तक, 6:46 PM – 6:47 PM IST
इस दौरान पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्य और मांगलिक गतिविधियाँ नहीं की जानी चाहिए (धार्मिक कार्य, नया भोजन बनाना, पूजा-पाठ इत्यादि)।
ग्रहण के दौरान क्या करना (ज्योतिष और परंपरा के अनुसार)
✔ ध्यान, मंत्र जाप या साधना: चंद्र ग्रहण के दौरान ध्यान, “ॐ द्यौः …” या चंद्र संबंधित मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।
✔ शांति और मौन: मानसिक संतुलन बनाए रखें।
✔ सकारात्मक सोच: ग्रहण ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों में लगाएं।
✔ दान-पुण्य: जरूरतमंद को दान देना शुभ फल देता है।
✔ धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और प्रेरक वाचन लाभदायक माना जाता है।
क्या न करें:
ग्रहण काल में नये कार्यों की शुरुआत न करें।
भारी भोजन न करें और विवाद/हताशा से दूर रहें।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के बाद क्या करें
ग्रहण समाप्ति के बाद हल्का स्नान करें।
घर, पूजा-घर की सफाई और शुद्धि करें।
चंद्र देवता को जल अर्पण (वास्तव में पारंपरिक पूजन क्रिया) कुछ समुदायों में लोक प्रथा है।
धीरे-धीरे नियमित गतिविधियों को पुनः शुरू करें।
ध्यान रखें कि ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली, ग्रहों की स्थिति और तत्वों पर निर्भर करता है, इसलिए व्यक्तिगत सलाह के लिए योग्य पंडित/ज्योतिष से सलाह लेना फायदेमंद होता है।






