हर बात स्टेटस पर और रिश्तों में बढ़ती दूरियां, फिर भी सोशल मीडिया को दे रहे लोग ज्यादा महत्व

हर पल की ऑनलाइन मौजूदगी की चाह में लोग भूल रहे हैं असली रिश्तों की अहमियत

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हर पल की अपडेट की होड़ में निजी भावनाएं हुई सार्वजनिक, सोशल मीडिया के असर से रिश्तों में बढ़ती दूरियां और बदलती जीवनशैली

आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ एक माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। हर वर्ग के लोग चाहे बच्चे हों, युवा हों या बुज़ुर्ग किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं। स्थिति यह हो गई है कि अब लोग अपने जीवन के हर छोटे-बड़े पल को ऑनलाइन साझा करना ज़रूरी समझने लगे हैं। आज समाज में एक नई प्रवृत्ति तेजी से उभर रही है, जहां किसी भी काम के बाद उसे सोशल मीडिया पर अपडेट करना लगभग अनिवार्य सा हो गया है। अगर किसी का मूड अच्छा है तो वह स्टेटस या पोस्ट के जरिए अपनी खुशी जाहिर करता है, वहीं अगर किसी से विवाद हो जाए तो वह भी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ जाता है। निजी भावनाएं अब निजी नहीं रह गई हैं, बल्कि सार्वजनिक हो गई हैं।

इसका असर पारिवारिक रिश्तों पर भी साफ देखने को मिल रहा है। पहले जहां परिवार के भीतर उत्पन्न हुए मतभेदों को आपस में बातचीत करके सुलझाया जाता था, वहीं अब लोग उन्हें ठीक करने के बजाय सोशल मीडिया पर स्टेटस और तंज के जरिए व्यक्त करने लगे हैं। एक-दूसरे पर इशारों-इशारों में किए गए ये वार कई बार रिश्तों को और कमजोर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि जो रिश्ते थोड़ी समझदारी और बातचीत से सुधर सकते थे, वे धीरे-धीरे टूटने लगते हैं। युवा वर्ग पर इसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। वे अपनी पहचान को सोशल मीडिया के जरिए स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। एक ही व्यक्ति कई प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय रहता है, जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप और स्नैपचैट। हर जगह मौजूद रहना और लगातार अपडेट देना आज एक ट्रेंड बन चुका है। इससे जहां एक ओर लोग जुड़े हुए महसूस करते हैं, वहीं दूसरी ओर तुलना और मानसिक दबाव जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।

बच्चों में भी सोशल मीडिया और मोबाइल का उपयोग तेजी से बढ़ा है। खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों की जगह अब स्क्रीन ने ले ली है। इसका असर उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ रहा है। वहीं बुज़ुर्ग वर्ग सोशल मीडिया के जरिए अपने परिवार और परिचितों से जुड़े तो हैं, लेकिन कई बार वे गलत जानकारी और फेक न्यूज़ का शिकार भी हो जाते हैं। नए दौर की यह नई तकनीक इंसान को इस कदर अपनी आदत बना चुकी है कि इससे बाहर निकलना आसान नहीं रह गया है। लोग चाहकर भी खुद को इससे दूर नहीं कर पाते, क्योंकि अब यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। देखा जाए तो सोशल मीडिया ने लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। यह एक ऐसी दुनिया बना चुका है जहां व्यक्ति वास्तविक जीवन से ज्यादा वर्चुअल जीवन में सक्रिय रहने लगा है। आज के समय में “अगर कुछ सोशल मीडिया पर नहीं है, तो मानो वह हुआ ही नहीं” यह सोच समाज में गहराई तक बैठ चुकी है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि लोग सोशल मीडिया का संतुलित और समझदारी से उपयोग करें, ताकि यह सुविधा उनके जीवन को बेहतर बनाए, न कि उसे प्रभावित करे।

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