दलमा की धरती पर उबाल: ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा को 25 फरवरी को माकुलाकोचा में ऐतिहासिक महा जनसभा

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▪️ ईको टूरिज्म योजनाओं को लेकर वन विभाग पर मनमानी के आरोप
▪️ जल, जंगल, जमीन और अस्मिता की लड़ाई को निर्णायक चरण में ले जाने का आह्वान

K Durga Rao

जमशेदपुर : दलमा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र इन दिनों गहरे असंतोष और आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। वन विभाग द्वारा कथित रूप से ग्राम सभाओं की सहमति के बिना ईको टूरिज्म योजनाओं को लागू किए जाने के विरोध में दलमा तराई क्षेत्र के आदिवासी-मूलवासी समाज ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। इसी क्रम में 25 फरवरी को माकुलाकोचा फुटबॉल मैदान में एक विशाल महा जनसभा आयोजित करने की घोषणा की गई है, जिसे आंदोलन का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

इस महा जनसभा की रणनीति और तैयारियों को लेकर एनएच-33 स्थित होटल वन पलासी में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण नेतृत्वकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की विकास योजना लागू करना न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ईको टूरिज्म के नाम पर वन विभाग स्थानीय समुदायों की परंपरागत भूमि, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान को नजरअंदाज कर रहा है। उनका कहना था कि सदियों से जल, जंगल और जमीन पर आश्रित समुदायों को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखना अन्यायपूर्ण है। ग्राम सभा को सर्वोच्च मान्यता देने की मांग करते हुए नेताओं ने स्पष्ट कहा कि बिना स्थानीय सहमति कोई भी योजना स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया, समाजसेवी बुद्धेश्वर मार्डी, गुरूचरण कर्मकार, जयनाथ सिंह, सुषेण सिंह सरदार, सुकु हांसदा सहित कई ग्रामीण नेताओं ने अपने विचार रखते हुए चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने अपनी कार्यशैली में पारदर्शिता और संवाद की पहल नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक गांव या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे दलमा क्षेत्र की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।

नेताओं ने कहा कि 25 फरवरी का महा जन सम्मेलन केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प का मंच होगा, जहां हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्र होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। यह सभा आने वाले समय में आंदोलन की दिशा और रणनीति तय करेगी।
बैठक के दौरान उपस्थित ग्रामीणों से अपील की गई कि वे बड़ी संख्या में माकुलाकोचा पहुंचकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। आयोजन को ऐतिहासिक बनाने और ग्राम सभा की सर्वोच्चता स्थापित करने का संकल्प दोहराया गया।

दलमा की पहाड़ियों और तराई क्षेत्र में उठती यह आवाज अब व्यापक जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है, जिसकी प्रतिध्वनि आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों तक सुनाई दे सकती

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