जाने-माने अभिनेता और विचारक अशुतोष राणा ने अपने पॉडकास्ट में शिक्षा की असली भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना या किसी भाषा में दक्षता हासिल करने तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य यह है कि वह दूर खड़े हुए व्यक्ति को पास लाने का हुनर सिखाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर हम पास खड़े व्यक्ति को दूर ले जाने का हुनर सिखा दें, तो यह केवल समस्या की जड़ नहीं, बल्कि समझ की कमी को उजागर करता है। अशुतोष राणा के अनुसार, सच्ची शिक्षा वह है जो इंसान को संवेदनशील, समझदार और दूसरों के साथ जुड़ने की क्षमता देती है।
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उन्होंने अपने पॉडकास्ट में यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा का मूल लक्ष्य केवल अकादमिक दक्षता प्राप्त करना नहीं है। अगर कोई व्यक्ति विद्वान है, तो इसका मतलब केवल यह नहीं कि वह किताबों का ज्ञान रखता है। असली विद्वान वह है जो समझ और सोच के माध्यम से दूसरों को जोड़ सके, और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सके। उन्होंने कहा, “समझ और इंसानियत ही सच्ची शिक्षा हैं। जब हम दूसरों को जोड़ना और समझना सीखते हैं, तभी शिक्षा का उद्देश्य पूरा होता है।”
अशुतोष राणा का यह संदेश आज के डिजिटल और त्वरित जीवन में बेहद प्रासंगिक है, जहाँ शिक्षा अक्सर केवल प्रमाणपत्र और डिग्री तक सीमित रह जाती है। उनके विचार यह याद दिलाते हैं कि सच्ची शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि इंसान को जोड़ने, समझने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने का हुनर है।





