- फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई करोड़ों की हेराफेरी
- ऑफिस से गायब मिले सबूत और नकद राशि
जमशेदपुर : समय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में ₹9 करोड़ 6 लाख से अधिक के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कंपनी के निदेशक राजेश कुमार सिंह ने साकची थाना में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए तीन अन्य निदेशकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अनूप रंजन, राम प्रकाश पांडेय और राजीव कुमार ने मिलकर 2017 से 2024 के बीच आपराधिक षड्यंत्र के तहत कंपनी से फर्जी दस्तावेजों के जरिए मोटी रकम निकाली।
बिना कैपिटल लगाए निकाली गई भारी राशि, ब्याज के नाम पर हुई हेराफेरी
राजेश सिंह के अनुसार, इन तीनों निदेशकों ने न कंपनी में पूंजी निवेश किया, न किसी प्रकार का लोन दिया, फिर भी ब्याज और ब्याज पर ब्याज निकालते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि
“इन लोगों ने किसी बोर्ड प्रस्ताव या बैलेंस शीट में उल्लिखित किए बिना करोड़ों रुपये निकाल लिए।”
जब उन्होंने हिसाब मांगा, तो दिसंबर 2024 के बाद से पैसा निकालना बंद कर दिया, लेकिन पहले निकाली गई रकम का कोई विवरण नहीं दिया गया।
विरोध के बाद ईमेल भेज कर डायरेक्टर पद से हटाया गया, मामला पहुंचा NCLT
राजेश सिंह ने बताया कि जब उन्होंने और उनकी पत्नी ने गबन का विरोध किया, तो उन्हें 11 फरवरी 2025 को निदेशक पद से हटाने का ईमेल भेजा गया। इस ईमेल के खिलाफ उन्होंने कोलकाता स्थित एनसीएलटी (National Company Law Tribunal) में केस दायर किया, जहां से 24 फरवरी को अंतरिम आदेश जारी कर कंपनी की संरचना में बदलाव पर रोक लगा दी गई।
ऑफिस में जब पहुंचे तो गायब थे दस्तावेज और नकदी

राजेश सिंह ने बताया कि जब वे 15 जुलाई 2025 को कंपनी के साकची स्थित ऑफिस पहुंचे, तो उनकी टेबल, कुर्सी, कंप्यूटर और अलमारी गायब थी, अलमारी का ताला बदल दिया गया था। अलमारी में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज और ₹2 लाख नकद भी गायब थे।
FIR में गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला, पुलिस कर रही जांच
राजेश सिंह ने अनूप रंजन, राम प्रकाश पांडेय, राजीव कुमार और उनकी पत्नियों के खिलाफ गबन (Embezzlement), फर्जीवाड़ा (Forgery), कूट रचना (Fabrication of Documents), आपराधिक षड्यंत्र (Criminal Conspiracy), सबूत नष्ट करने (Tampering of Evidence) जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले ने कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के मामलों में नया मोड़ ला दिया है और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की संभावना तेज़ हो गई है।





