राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह का विधिवत उद्घाटन किया

Raj Sharma
2 Min Read

जमशेदपुर (झारखंड)

आज समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के जश्न में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के करनडीह में आयोजित ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने के समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर साथ में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहे और उन्होंने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम स्थल पर भारी जनसमूह और सांस्कृतिक उत्साह देखने को मिला, जहां कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने मधुर ‘पाइपर बैंड’ व राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रपति का अभिनंदन किया। इस मौके पर आदिवासी संस्कृति की महत्ता और ओलचिकी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिये समर्पण को भी जोरदार समर्थन मिला।

राष्ट्रपति मुर्मू के झारखंड दौरे के तहत यह कार्यक्रम विशेष रूप से संथाली भाषा और उसकी पारंपरिक लिपि को मान्यता, सम्मान तथा संरक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। इससे इस भाषा के लाखों मातृभाषियों को गर्व और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी।

🔎 पृष्ठभूमि: ओलचिकी लिपि संताली भाषा की पारंपरिक लिपि है, जिसे भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस लिपि की शताब्दी समारोहों में राजनीतिक और सांस्कृतिक हस्तियाँ शामिल होकर भाषाई समानता को बढ़ावा देती हैं।

Share This Article