नई दिल्ली: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ने संयुक्त रूप से एक ज्वाइंट पीएचडी प्रोग्राम शुरू किया है। यह पहल उन छात्रों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आई है जो पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। इस संयुक्त कार्यक्रम के तहत छात्रों को भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में अध्ययन और अनुसंधान करने का अवसर मिलेगा।
आईआईटी दिल्ली और क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की इस साझेदारी के तहत चयनित छात्रों को चार वर्षों के भीतर पीएचडी पूरी करनी होगी। सबसे खास बात यह है कि इस कार्यक्रम को पूरा करने के बाद छात्रों को दोनों संस्थानों की संयुक्त डिग्री प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग, शोध आदान-प्रदान और नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
आवेदन प्रक्रिया 30 अक्टूबर 2025 से शुरू होगी और 7 जनवरी 2026 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार UQIITD.org वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद पात्र उम्मीदवारों की सूची 21 जनवरी से 4 मार्च 2026 के बीच जारी की जाएगी। इसके पश्चात 7 से 16 अप्रैल 2026 के बीच चयनित उम्मीदवारों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे।
इस संयुक्त पीएचडी प्रोग्राम के तहत छात्रों को आकर्षक स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। IIT दिल्ली में पहले वर्ष के दौरान छात्रों को ₹37,000 प्रति माह का स्टाइपेंड मिलेगा, जो तीसरे और चौथे वर्ष में बढ़कर ₹42,000 प्रति माह हो जाएगा। इसके अलावा ₹10,000 प्रति माह का अतिरिक्त टॉप-अप स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। वहीं, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी में रिसर्च के दौरान छात्रों को 36,400 ऑस्ट्रेलियन डॉलर वार्षिक स्टाइपेंड मिलेगा, जिसमें विश्वविद्यालय की ट्यूशन फीस और यात्रा व्यय भी शामिल होंगे।
यह संयुक्त कार्यक्रम न केवल छात्रों को अंतरराष्ट्रीय रिसर्च अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें विभिन्न विषयों में वैश्विक विशेषज्ञों के साथ काम करने का अवसर भी देगा। इस पहल से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में सहयोग को मजबूती मिलेगी। दोनों संस्थानों की यह पहल उन छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी जो तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में अनुसंधान कर वैश्विक स्तर पर योगदान देना चाहते हैं।





