विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक, 9 अगस्त को होगा वृहद कार्यक्रम
गम्हरिया: कांड्रा स्थित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में आदिवासी सांवता सुसार अखाड़ा की ओर से विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन मुख्य रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम में आदिवासी समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि झारखंड का आदिवासी समाज धर्मांतरण, घुसपैठ और अस्तित्व के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीनों पर अतिक्रमण बढ़ रहा है और कई जिलों, विशेषकर पाकुड़ में आदिवासी समाज अल्पसंख्यक हो चुका है। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली के नाम पर आदिवासियों को ठगा गया है। ग्राम सभाओं के अधिकारों को कमजोर करने के लिए नियमावली में ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं, जिनसे उनकी वास्तविक भूमिका सीमित हो जाती है।
अखाड़ा के संयोजक रामदास टुडू ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी पहचान, संस्कृति, भाषा, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दिवस है। उन्होंने समाज के लोगों से 9 अगस्त को बड़ी संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की अपील की। बैठक में दारा सिंह सोरेन, सोनाराम मार्डी, राम हांसदा, सुजान हांसदा, पवन हांसदा, मोहन बास्के, पाइतो सोरेन, मनसा राम मुर्मू, बुद्धेश्वर मार्डी, कालीचरण सरदार, प्रधान मार्डी, भोला हेम्ब्रम, भीम हांसदा, साइमल मार्डी, रतन सोरेन और रायशन सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
पेसा नियमावली के नाम पर आदिवासियों को ठगा जा रहा है : चम्पाई सोरेन





