10 लाख के इनामी समेत चार नक्सलियों ने हथियार डाले, 2200 से अधिक कारतूस बरामद

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  • ऑपरेशन नवजीवन-III में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, चारों पर कुल 129 मामले दर्ज

के दुर्गा राव

चाईबासा/सरायकेला। कोल्हान, पोड़ाहाट और सारंडा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत मंगलवार को प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के चार सक्रिय सदस्यों ने पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। इनमें 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सलुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ डांगिल भी शामिल है। आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सलियों में एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कोदम मुनी, दस्ता सदस्य पिंकी पूर्ति उर्फ सकाती पूर्ति और अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम उर्फ मुक्ता शामिल हैं।
सलुका कायम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी पूर्ति ने चाईबासा पुलिस के समक्ष, जबकि अनिता तामसोय ने सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। चारों के पास से एके-47, इंसास राइफल, वायरलेस सेट, मैगजीन और 2,200 से अधिक जिंदा कारतूस समेत अन्य सामग्री बरामद की गई।

सलुका पर 96 मामले, एके-47 और 843 कारतूस बरामद

पुलिस के अनुसार 10 लाख रुपये का इनामी सलुका कायम माओवादी संगठन के जोनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय था। उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 90 और सरायकेला-खरसावां में छह मामले दर्ज हैं। इस तरह उसके खिलाफ कुल 96 मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक एके-47, दो मैगजीन और 843 कारतूस समेत अन्य सामग्री मिली।

एक लाख रुपये की इनामी दस्ता सदस्य कोदोमुनी कोड़ा के खिलाफ

चाईबासा में सात मामले दर्ज हैं। उसके पास से वायरलेस सेट और 697 कारतूस बरामद हुए। पिंकी पूर्ति के खिलाफ चाईबासा में 13 मामले हैं। उसके पास से वायरलेस सेट और 639 कारतूस मिले।
सरायकेला-खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाली अनिता तामसोय के खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम में 12 और सरायकेला-खरसावां में एक मामला दर्ज है। उसके पास से इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 97 कारतूस बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक चारों के खिलाफ दोनों जिलों में कुल 129 मामले दर्ज हैं।

डीआईजी ने कहा- आत्मसमर्पण का बेहतर अवसर

आत्मसमर्पण कार्यक्रम में कोल्हान के पुलिस उपमहानिरीक्षक अनुरंजन किस्टोफा ने इसे नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वर्षों से जारी संयुक्त अभियानों के कारण माओवादी संगठन लगातार कमजोर हुआ है।
उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन शुरू करने का यह बेहतर अवसर है। साथ ही सुरक्षा बलों को अभियान जारी रखने के साथ ग्रामीणों और आम लोगों के साथ बेहतर संवाद कायम करने का निर्देश दिया।

सीआरपीएफ ने विकास को बताया अगली प्राथमिकता

सीआरपीएफ के चाईबासा डीआईजी ने भी आत्मसमर्पण को बड़ी उपलब्धि बताते हुए पिछले करीब तीन दशकों में नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद जवानों और अधिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि कोल्हान और सारंडा के जंगलों में लगातार अभियान से सुरक्षा की स्थिति में बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि अब सुरक्षित माहौल का लाभ क्षेत्र के विकास को मिलना चाहिए। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं को ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना जरूरी है। विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।

सरायकेला एसपी बोले- अब गिने-चुने नक्सली सक्रिय

सरायकेला-खरसावां के एसपी मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियां काफी सीमित हो गई हैं। उनके अनुसार जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में अब करीब पांच से छह नक्सलियों के सक्रिय होने की जानकारी है।
उन्होंने बचे नक्सलियों से हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलेगा, जबकि हिंसा जारी रखने वालों के खिलाफ सुरक्षा अभियान चलता रहेगा।

असीम मंडल का दस्ता सुरक्षा बलों के निशाने पर

कोल्हान डीआईजी ने बताया कि अब क्षेत्र में छोटे नक्सली दस्ते सुरक्षा बलों के लिए प्रमुख चुनौती हैं। असीम मंडल के दस्ते की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और उसकी गिरफ्तारी के लिए अभियान जारी है। उन्होंने असीम मंडल समेत अन्य बचे माओवादी सदस्यों से भी हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की।

नवजीवन अभियान से लगातार कमजोर हो रहा संगठन

ऑपरेशन नवजीवन के पिछले चरणों में भी सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2025 में चाईबासा पुलिस के समक्ष माओवादी संगठन के 10 सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद 21 मई 2026 को नवजीवन-I के तहत 27 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने हथियार डाले। इनके पास से 16 हथियार और 3,082 गोलियां बरामद हुई थीं।
28 जुलाई 2026 को नवजीवन-II के तहत 14 नक्सली कमांडर एवं दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। इनके पास से 10 हथियार और 1,412 गोलियां बरामद हुई थीं। अब 11 अगस्त को नवजीवन-III में चार नक्सलियों के आत्मसमर्पण को इसी अभियान की अगली बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार वर्ष 2025-26 में जुलाई तक पश्चिमी सिंहभूम में 49 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 22 मुठभेड़ में मारे गए और 60 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

तीन दशक की हिंसा के बाद विकास की उम्मीद

कोल्हान क्षेत्र में करीब तीन दशकों तक नक्सली गतिविधियां सुरक्षा और विकास के लिए बड़ी चुनौती बनी रहीं। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगल माओवादी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे। लगातार अभियान, गिरफ्तारियों, मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण के बाद संगठन की पकड़ कमजोर होने का दावा सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं।
अधिकारियों का मानना है कि नक्सलवाद को स्थायी रूप से कमजोर करने के लिए सुरक्षा अभियानों के साथ ग्रामीणों का विश्वास जीतना, विकास योजनाओं को जमीन तक पहुंचाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है।
मंगलवार का आत्मसमर्पण कोल्हान में बदलते सुरक्षा परिदृश्य का संकेत माना जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों का संदेश स्पष्ट है—हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए पुनर्वास का रास्ता खुला है, जबकि हिंसा जारी रखने वाले माओवादी दस्तों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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