कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राज्य सरकार की ओर से दावा किया गया है कि सत्ता संभालने के बाद शुरू किए गए विशेष अभियान के तहत बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें सीमा पार भेजा गया है। सरकार के अनुसार यह कार्रवाई “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4,800 से अधिक लोगों को बांग्लादेश वापस भेजे जाने का दावा किया गया है, जबकि 836 अन्य लोगों को विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में रखा गया है और उनके मामलों की प्रक्रिया जारी है। राज्य सरकार का कहना है कि सीमावर्ती जिलों में पहचान अभियान तेज किया गया है तथा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। दूसरी ओर, इस कार्रवाई को लेकर सीमा पर कुछ स्थानों पर तनाव की स्थिति भी बनी, जहां कथित तौर पर सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (BGB) के बीच समन्वय संबंधी चुनौतियां सामने आईं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 19 मई को आधिकारिक रूप से “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति की घोषणा की थी। इसके बाद 25 मई को अवैध प्रवासियों को राज्य छोड़ने की चेतावनी दी गई। 27 मई को पुलिस को निर्देश दिया गया कि पकड़े गए संदिग्ध अवैध प्रवासियों को जेल भेजने के बजाय बीएसएफ को सौंपा जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई हो सके। 30 मई को राज्य सरकार ने 2,680 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की सूची सत्यापन के लिए बांग्लादेश सरकार को भेजने का दावा किया।
7 जून को एक प्रशिक्षण शिविर में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने के दौरान 4,800 लोगों को वापस भेजा गया है, जो नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते थे। इसके बाद 8 जून को राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगभग 100 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने हेतु बीएसएफ को भूमि उपलब्ध कराने की जानकारी दी। 10 जून को नबान्ना में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य प्रशासन और बीएसएफ मिलकर घुसपैठ रोकने के लिए काम कर रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार 19 मई से 10 जून के बीच कम से कम 1,930 लोगों को सीमा चौकियों के माध्यम से वापस भेजा गया। इस बीच नई दिल्ली में बीएसएफ और बीजीबी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी हुई, जिसके बाद सीमा प्रबंधन और अवैध घुसपैठ से जुड़े मामलों में बेहतर समन्वय की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इन आंकड़ों और दावों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा जारी है।






